आषाढ़ मास 2025 में हिंदू पंचांग के अनुसार 12 जून 2025 (बृहस्पतिवार) से आरंभ होकर 10 जुलाई 2025 (गुरुवार) तक चलेगा। यह मास वर्षा ऋतु की शुरुआत का प्रतीक होता है और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। 1. संकष्टी गणेश चतुर्थी – 14 जून 2025 (शनिवार) महत्व: भगवान गणेश की पूजा से विघ्नों का नाश होता है। व्रत विधि: उपवास रखकर चंद्रमा के दर्शन के बाद व्रत पूर्ण किया जाता है। 2. मिथुन संक्रांति – 15 जून 2025 (रविवार) महत्व: सूर्य के मिथुन राशि में प्रवेश का दिन, दान-पुण्य के लिए शुभ। 3. योगिनी एकादशी – 21 जून 2025 (शनिवार) महत्व: पापों के नाश और मोक्ष की प्राप्ति के लिए यह व्रत किया जाता है। व्रत विधि: निर्जला उपवास रखकर भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। 4. सोम प्रदोष व्रत – 23 जून 2025 (सोमवार) महत्व: भगवान शिव की कृपा प्राप्ति के लिए यह व्रत रखा जाता है। व्रत विधि: शाम के समय शिवलिंग का अभिषेक और पूजा की जाती है। 5. मासिक शिवरात्रि – 23 जून 2025 (सोमवार) महत्व: प्रत्येक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को भगवान शिव की आराधना की जाती है। 6. आषाढ़ अमावस्या – 25 जून 2025 (बुधवार) महत्व: पितृ तर्पण और दान-पुण्य के लिए यह दिन विशेष होता है। 7. गुप्त नवरात्रि प्रारंभ – 26 जून 2025 (बृहस्पतिवार) महत्व: तांत्रिक साधना और शक्ति उपासना के लिए यह नवरात्रि महत्वपूर्ण होती है। 8. जगन्नाथ रथ यात्रा – 27 जून 2025 (शुक्रवार) महत्व: पुरी, ओडिशा में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की रथ यात्रा निकाली जाती है। 9. देवशयनी एकादशी – 6 जुलाई 2025 (रविवार) महत्व: भगवान विष्णु के चार महीने के शयन काल की शुरुआत, जिसे चातुर्मास कहा जाता है। 10. गुरु पूर्णिमा – 10 जुलाई 2025 (गुरुवार)8. जगन्नाथ रथ यात्रा – 27 जून 2025 (शुक्रवार) महत्व: पुरी, ओडिशा में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की रथ यात्रा निकाली जाती है। 9. देवशयनी एकादशी – 6 जुलाई 2025 (रविवार) महत्व: भगवान विष्णु के चार महीने के शयन काल की शुरुआत, जिसे चातुर्मास कहा जाता है। 10. गुरु पूर्णिमा – 10 जुलाई 2025 (गुरुवार)