साहेब गरीबदास जी महाराज कहते हैं,👇 मन तू चल रे सुख के सागर जहाँ शब्द सिन्धु रत्नागर । कोटि जन्म तोहे भ्रमत हो गए कुछ ना हाथ लगा रे । कुकर शुकर खर भया बौरे कवुआ हंस बुगा रे । कोटि जन्म तू राजा किन्हा मिटी न मन की आशा । भिक्षुक होकर दर-2 हांडया मिला न निर्गुण राशा । इन्द्र कुबेर ईश की पदवी ब्रह्मा वरूण धर्मराया । विष्णु नाथ के पुर को जाकर फेर अपूठा आया । असंख्य जन्म तोहे मरते होगे जीवित क्यों ना मरै रे । द्वादश मध्य महल मठ बौरे बहुर ना देह धरै रे । दोजख भीस्त सभी तैं देखे राज पाठ के रसिया । तीन लोक से तृप्त नाहीं यह मन भोगी खसिया । सतगुरु मिले तो इच्छा मेटे पद मिल पदे समाना । चल हंसा उस लोक पठाऊँ, जो आदि अमर अस्थाना । चार मुक्ति जहाँ चम्पि करती माया हो रही दासी । दास गरीब अभय पद परसै मिले राम अविनाशी ।।🙏 मेरे परमात्मा रामपाल जी साहेब जी सत्संग में बताते हैं कि इस काल लोक में IAS IPS तो क्या, ना जाने कितनी बार हम पृथ्वी के चक्रवर्ती सम्राट, स्वर्ग के राजा इन्द्र, धन के देवता कुबेर, ब्रह्मा, विष्णु, महेश, धर्मराज आदि के पद पर भी बैठ चुके हैं, लेकिन सत भक्ति के बिना हमने सिर्फ पाप ही इकट्ठे किए हैं और इसीलिए आज तक यहां भटक रहे हैं, पार नहीं हो पा रहे... बन्दी छोड़ के शब्दों में "अब मोक्ष_का_Season है", अब भी अगर यही डले ढोते रहें कभी भी पार नहीं हो पाएंगे, और वो अनमोल चीज़ कभी नही पा सकेंगे जिसके लिए अधम सुल्तान ने बल्ख बुखारे का राज त्याग दिया, मीरा ने परिवार छोड़ दिया, सम्मन ने अपने बेटे की गर्दन काट दी, मंसूर ने अपने शरीर का टुकड़े टुकड़े करवा लिए, और भी न जाने कितने प्रभु प्रेमियों ने अपना सब कुछ न्योछावर करदिया, वो परमात्मा खुद अपने सुख सागर से चलकर आया है हमारे लिए। अगर अब भी हम चूक गए तो हमसे बड़ा निर्धन इस 21 ब्रह्मांड में कोई नहीं होगा......... 2 रोटी परमात्मा ने देनी हैं, उसका जुगाड़ भी वही करवाएगा हमसे, चाहे IAS बनाये या चपरासी, क्योंकि मालिक कहते हैं, की इस काल लोक में जब तक जीवन है timepas करना है और भक्ति करनी है। लेकिन अगर इस सच्चे ज्ञान को प्राप्त करके भी हम ऊंचे पद और माया के पीछे भागते हैं, तो इसका मतलब ज्ञान अभी हृदय में समाया ही नहीं है। क्योंकि वो पद और सुख जिसके कारण हम भगवान को भूल जाए, वह हमारा सबसे बड़ा दुश्मन है... कबीर, राम रटत दारिद्र भला, टूटी घर की छान। वो सुंदर महल किस काम के, जहां भक्ति नहीं भगवान।। इसलिए अब वक्त है असली रामनाम की पढ़ाई पढ़ने का...😊🙏 कबीर, अब तो जूझै ही बनै, मुड़ चाले घर दूर। सिर साहेब को सौंपते, सोच न कीजै सूर।। Thank you

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