गणपती आरती : सुखकर्ता दुखहर्ता Sukhkarta Dukhharta Aarti | Ganpati Aarti Full | Mantra Pushpanjali Song Details: १. सुखकता दुखहता 00:00 २. शेंदुर लाल चढ़ायो 06:13 ३. लवथवति विक्राला आरती 07:36 ४. दुर्गे दुर्घट भारी 09:35 ५. गालिन लोटांगन 11:03 ६. मंत्र पुष्पांजली 12:10 🔔 Subscribe to the channel https://www.youtube.com/c/WingsMusicStore सबस्क्राईब करा आणि व्हिडिओ ला लाईक करा आणि शेअर करा @WingsMusicStore Credits: Singer: Sadhana Sargam Lyrics: Traditional Music: Milind Mohite Music Label: Wings Music © & ℗ Wings Entertainment Ltd Lyrics: सुखकर्ता दुखहर्ता, SukhKarta Dukhharta वार्ता विघ्नांची Varta Vighnachi नुरवी पुरवी प्रेम, Noorvi Poorvi Prem कृपा जयाची Krupya Jayachi सर्वांगी सुंदर, Sarwangi Sundar उटी शेंदुराची Uti shendurachi कंठी झळके माळ, Kanthi Jhalke Maal मुक्ताफळांची Mukhta Padhanchi जय देव, जय देव Jai Dev Jai Dev जय मंगलमूर्ती Jai Mangal Murti दर्शनमात्रे Darshan Marte मन कामना पुरती Man Kamana Purti जय देव, जय देव Jai Dev Jai Dev रत्नखचित फरा, Ratnakhachit Phara तुज गौरीकुमरा Tujh Gaurikumra चंदनाची उटी , Chandanaachi Uti कुमकुम केशरा| Kumkum Keshara हिरेजडित मुकुट, Hirejadit Mukut शोभतो बरा Shobhato Bara रुणझुणती नूपुरे, Runjhunati Nupure चरणी घागरिया| Charani Ghagriya जय देव, जय देव Jai Dev Jai Dev जय मंगलमूर्ती| Jai Mangal Murti दर्शनमात्रे Darshan Marte मन कामना पुरती ॥धृ॥ Maan Kamana Purti जय देव, जय देव Jai Dev Jai Dev लंबोदर पीतांबर, Lambodar Pitaambar फणिवरबंधना | Phanivar Bandana सरळ सोंड, Saral Sond वक्रतुंड त्रिनयना| Vakratunda Trinayana दास रामाचा, Das Ramacha वाट पाहे सदना| Vat Pahe Sadna संकटी पावावे, Sankati Pavave निर्वाणी रक्षावे, Nirvani Rakshave सुरवरवंदना| Survar Vandana जय देव, जय देव Jai Dev Jai Dev जय मंगलमूर्ती| Jai Mangal Murti दर्शनमात्रे Darshan Marte मन कामना पुरती ॥धृ॥ Maan Kamana Purti जय देव, जय देव Jai Dev Jai Dev शेंदुर लाल चढायो Shendur Laal Chadhayo अच्छा गजमुख को | Acchha Gajamukha ko | दोन्दिल लाल बिराजे Dondil Laal Biraje सूत गौरिहर को || Sut Gaurihar ko || हाथ लिए गुड लड्डू Hath Liye Gud-laddu साई सुरवर को Sain Suravara ko | महिमा कहे ना Mahima Kahe Na जाय लागत हूँ पद को Jaay Lagat Hoon Padako | जय जय जी गणराज Jai Jai Jee Ganaraj विद्यासुखदाता Vidya Sukhadata धन्य तुम्हारो दर्शन Dhany Tumhara Darshan मेरा मत रमता .. Mera Man Ramata.. जय देव जय देव Jai Dev Jai Dev अष्टो सिधि दासी संकट को बैरी विघन विनाशन मंगल मूरत अधिकारी कोटि सूरज प्रकाश ऐसे छबी तेरी गंडस्थल मदमस्तक झूल शशि बिहरी जय जय जी गणराज विद्यासुखदाता धन्य तुम्हारो दर्शन मेरा मन रमता .. जय देव जय देव भावभगत से कोई शरणागत आवे संतति संपत्ति सबही भरपूर पावे ऐसे तुम महाराज मोको अति भावे गोसावीनंदन निशिदिन गुण गावे जय जय जी गणराज विद्यासुखदाता धन्य तुम्हारो दर्शन मेरा मन रमता जय देव जय देव लवथवती विक्राळा ब्रह्मांडी माळा वीषें कंठ काळा त्रिनेत्री ज्वाळा लावण्यसुंदर मस्तकीं बाळा तेथुनियां जल निर्मळ वाहे झुळझूळां जय देव जय देव जय श्रीशंकरा हो स्वामीशंकरा आरती ओवाळूं तुज कर्पूरगौरा जय देव जय देव कर्पूरगौरा भोळा नयनीं विशाळा अर्धांगीं पार्वती सुमनांच्या माळा विभुतीचें उधळण शितिकंठ नीळा ऐसा शंकर शोभे उमावेल्हाळा जय देव जय देव जय श्रीशंकरा हो स्वामीशंकरा आरती ओवाळूं तुज कर्पूरगौरा जय देव जय देव देवीं दैत्य सागर मंथन पै केलें त्यामाजीं अवचित हळाहळ उठिले तें त्वां असुरपणे प्राशन केले नीळकंठ नाम प्रसिद्ध झालें जय देव जय देव जय श्रीशंकरा हो स्वामीशंकरा आरती ओवाळूं तुज कर्पूरगौरा जय देव जय देव व्याघ्रांबर फणिवरधर सुंदर मदनारी पंचानन मनमोहन मुनिजनसुखकारी शतकोटीचें बीज वाचे उच्चारी रघुकुळटिळक रामदासा अंतरीं जय देव जय देव जय श्रीशंकरा हो स्वामीशंकरा आरती ओवाळूं तुज कर्पूरगौरा जय देव जय देव दुर्गे दुर्घट भारी तुजविण संसारी अनाथ नाथे अंबे करुणा विस्तारी वारी वारी जन्म मरणांते वारी हारी पडलो आता संकट निवारी जय देवी जय देवी महिषासुर मथिनी सुरवर ईश्वर वरदे तारक संजीवनी जय देवी जय देवी त्रिभुवन-भुवनी पाहता तुज ऐसी नाही चारी श्रमले परंतु न बोलवे काही साही विवाद करिता पडले प्रवाही ते तू भक्तालागी पावसि लवलाही जय देवी जय देवी महिषासुर मथिनी सुरवर ईश्वर वरदे तारक संजीवनी जय देवी जय देवी प्रसन्न वदने प्रसन्न होसी निजदासा क्लेशांपासुनि सोडवि तोडी भवपाशा अंबे तुजवाचून कोण पुरविल आशा नरहरी तल्लिन झाला पदपंकजलेशा जय देवी जय देवी महिषासुर मथिनी सुरवर ईश्वर वरदे तारक संजीवनी जय देवी जय देवी घालीन लोटांगण, वंदीन चरणन डोळ्यांनी पाहीन रूप तुझें प्रेमें आलिंगन, आनंदे पूजिन भावें ओवाळीन म्हणे नामा त्वमेव माता च पिता त्वमेव त्वमेव बंधु: सखा त्वमेव त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव त्वमेव सर्वं मम देवदेव कायेन वाचा मनसेंद्रियैर्वा बुद्धयात्मना वा प्रकृतिस्वभावात करोमि यध्यत् सकलं परस्मै नारायणायेति समर्पयामि अच्युतं केशवं रामनारायणं कृष्णदामोदरं वासुदेवं हरिम श्रीधरं माधवं गोपिकावल्लभं जानकीनायकं रामचंद्रभजे हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे #GanpatiAarti #sukhkartadukhharta #marathiaarti